लोक माध्यम

Tuesday, 7 February 2017

' अबे सुन बे गुलाब ' - रोज़ डे और निराला की कविता - कुकुरमुत्ता / विजय शंकर सिंह

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आज सोशल मिडिया पर रोज़ डे मनाया जा रहा है । यह वैलेंटाइन डे के अनेक दिनों में से एक है । यह प्रेम और प्रेम प्रदर्शन का पाश्चात्य पर्व हैं। प्...
Friday, 3 February 2017

हरिशंकर परसाई की एक व्यंग्य रचना - चूहा और मैं / विजय शंकर सिंह

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एक बार डॉ लोहिया ने कहा था, लोग धर्म और आस्था के सवाल पर जितने एकजुट और संघर्ष शील हो जाते हैं उतने वे रोटी के सवाल पर क्यों नहीं होते । डॉ ...
Sunday, 29 January 2017

जायसी के पद्मावत पर आचार्य राम चंद्र शुक्ल का लेख / विजय शंकर सिंह

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आचार्य राम चंद्र शुक्ल, हिंदी के प्रथम आलोचक थे । उनके समीक्षा सिद्धांतों पर आधुनिक आलोचना की नींव पडी। पहली बार उन्होंने ही हिंदी साहित्य क...
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